🚩 ॐ नमः शिवाय • हर हर महादेव • सर्वे भवन्तु सुखिनः 🚩
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📖 मंदिर का इतिहास

श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास का ऐतिहासिक विकास

❖ मंदिर का इतिहास:

वर्ष 1983

प्राचीन काल में यह मंदिर वर्तमान स्टेट बैंक के स्थान पर स्थित था। वर्ष 1983 में बिहार राज्य आवास बोर्ड द्वारा उक्त प्लॉट को श्री जागेश्वर प्रसाद (शंकर शॉपिंग सेंटर) को आवंटित कर दिया गया।

जन आक्रोश के कारण बिहार राज्य आवास बोर्ड द्वारा मंदिर को वहाँ से पार्क 45 में शिव लिंग की स्थापना कर मंदिर का रूप दे दिया गया।

इस प्रकार मंदिर का नया स्वरूप अस्तित्व में आया और नियमित रूप से पूजा-अर्चना प्रारम्भ हुई।

वर्ष 1986

समिति का गठन एवं मंदिर का जीर्णोद्धार

वर्ष 1986 में मंदिर की जर्जर एवं अव्यवस्थित स्थिति को देखते हुए स्थानीय श्रद्धालुओं एवं नागरिकों की एक आम सभा आयोजित हुई।

मंदिर के संरक्षण एवं विकास के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया गया।

प्रथम समिति
अध्यक्ष – श्री बाबू जगदीप सिंह
सचिव – श्री ध्रुव नारायण सिंह

द्वारा मंदिर का संरक्षण एवं विकास आरंभ हुआ।

दो वर्ष पश्चात पुनः आम सभा आयोजित हुई एवं समिति का पुनर्गठन किया गया, इसमें श्री कपिल देव प्रसाद यादव को अध्यक्ष, श्री गौतम प्रसाद भट्ट को सचिव तथा श्री शिवेन्द्र नारायण चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।

श्री शिवेन्द्र नारायण चौधरी की अध्यक्षता में मंदिर के संविधान एवं नियमावली बनाई गई।

वर्ष 1989

निर्माण, प्राण-प्रतिष्ठा एवं विस्तार

वर्ष 1989 में श्री हनुमान जी के मंदिर का निर्माण एवं हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। मंदिर के इतिहास में यह महत्वपूर्ण वर्ष सिद्ध हुआ।

पुनर्गठन

समिति का पुनर्गठन

दो वर्ष बाद पुनः समिति का पुनर्गठन किया गया। उस समय श्री कौशल कुमार शर्मा को अध्यक्ष तथा श्री अशोक सिन्हा को सचिव के रूप में मंदिर समिति का संचालन करने का दायित्व दिया गया। उनके नेतृत्व में मंदिर के विकास कार्य निरंतर आगे बढ़ते रहे।

वर्ष 1993

आम सभा के द्वारा

संरक्षक मंडल
डॉ विनोद कुमार सिंह
श्री कपिलदेव प्रसाद यादव
श्री नीरज चौबे
कार्यकारिणी सदस्य
अध्यक्ष – श्री कौशल कुमार शर्मा
उपाध्यक्ष – श्री रामेश्वर सिंह
सचिव – श्री ध्रुव नारायण सिंह
कोषाध्यक्ष – श्री राज नारायण सिंह
सदस्य – श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह
सदस्य – श्री सतीश कुमार सिंह
सदस्य – श्री रंजन कुमार राजीव
सदस्य – श्री राजीव मोहन
सदस्य – श्री हरी प्रसाद मधुकर
सदस्य – श्रीमती मधु जी
सदस्य – श्री विजय कुमार सिंह
सदस्य – श्री सच्चिदानंद सिंह
सदस्य – श्री नीरज कुमार सिंह

इसके पश्चात प्रत्येक 3 साल पर शिव शक्ति मंदिर धार्मिक न्यास की आम सभा होती रही और कार्यकारिणी समिति में थोड़े- बहुत परिवर्तन के साथ मंदिर की कार्यकारिणी अपना दायित्व निभाती रही।

महत्वपूर्ण कार्यकाल

मंदिर का निबंधन

इस कार्यकाल में मंदिर ने अपने वर्तमान स्वरूप की ओर महत्वपूर्ण प्रगति की। श्री आनन्द मिस्त्री, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य आवास बोर्ड, के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में मंदिर को वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ। मंदिर के निर्माण में उनका अहम योगदान रहा। वर्ष 2009 में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई, जिससे मंदिर का धार्मिक एवं सामाजिक महत्व और अधिक बढ़ा। श्री राज नारायण सिंह कोषाध्यक्ष के स्वर्गवास के उपरांत श्री राजीव मोहन तथा श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह के द्वारा समिति के कोषाध्यक्ष के रूप में अहम जिम्मेदारी का निर्वहन किया गया।

वर्ष 2013

मंदिर का निबंधन

वर्ष 2013 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद् के द्वारा जाँचोपरांत मंदिर का निबंधन किया गया।

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Our Inspiration
🕉 हमारी प्रेरणा

श्रद्धा, सेवा एवं मानवता से प्रेरित

न्यास की प्रत्येक पहल सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति एवं निःस्वार्थ सेवा की भावना से प्रेरित है।

सनातन धर्म

शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों एवं पवित्र परंपराओं का संरक्षण।

निःस्वार्थ सेवा

समाज के प्रत्येक वर्ग की करुणा एवं समर्पण के साथ सेवा।

सामाजिक समरसता

प्रेम, सम्मान एवं संस्कारों के माध्यम से एकजुट समाज का निर्माण।

👥 न्यास समिति

हमारी वर्तमान समिति

न्यास के पदाधिकारी एवं सदस्य सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के संचालन एवं समाज सेवा के लिए समर्पण, पारदर्शिता एवं श्रद्धा के साथ मिलकर कार्य करते हैं।

धर्मेन्द्र कुमार सिंह
अध्यक्ष
धर्मेन्द्र कुमार सिंह

सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के विकास, कार्यकारिणी की बैठकों का संचालन एवं समाज सेवा के कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।

विजय कुमार सिंह
उपाध्यक्ष
विजय कुमार सिंह

सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यकारिणी की बैठकों का संचालन एवं मंदिर के कार्यों में अपना सहयोग देते रहते हैं।

ध्रुव कुमार सिंह
सचिव
ध्रुव नारायण सिंह

सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के विकास, नित्य कार्यों का संचालन एवं समाज सेवा के कार्य करने का दायित्व निभाते हैं।

राजीव मोहन
कोषाध्यक्ष
राजीव मोहन

ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, दान प्रबंधन, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता तथा सनातन धर्म की रक्षा सुनिश्चित करते हैं।

बीके विद्यार्थी
सदस्य
बी.के. विद्यार्थी

सनातन धर्म की रक्षा, वित्तीय व्यवस्था में सहयोग, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता

सतीश सिंह
सदस्य
सतीश सिंह

सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, मंदिर के प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता एवं सहयोग

उपेंद्र सिंह
सदस्य
उपेंद्र सिंह

सनातन धर्म की रक्षा एवं मंदिर के प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता

देवेंद्र सिंह
सदस्य
देवेंद्र प्रसाद सिंह

सनातन धर्म की रक्षा एवं मंदिर के प्रत्येक कार्य एवं अनुष्ठानों में सहभागिता

नीरज कुमार सिंह
सदस्य
नीरज कुमार सिंह

सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता

स्मृति डेरगवे
सदस्य
स्मृति डेरगवे

सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता

रंजन कुमार राजीव
सदस्य
रंजन कुमार राजीव

सनातन धर्म की रक्षा, मंदिर के प्रत्येक कार्य एवं अनुष्ठानों में सहयोग एवं सहभागिता।

🎯 दृष्टि एवं उद्देश्य

श्रद्धा, सेवा एवं संस्कारों के प्रति प्रतिबद्ध

हमारा उद्देश्य केवल मंदिर संचालन तक सीमित नहीं है। सनातन धर्म, आध्यात्मिक चेतना एवं निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से समाज के जीवन को बेहतर बनाना हमारा संकल्प है।

हमारी दृष्टि

ऐसे समाज का निर्माण करना जहाँ सनातन धर्म, आध्यात्मिकता, भारतीय संस्कृति एवं निःस्वार्थ सेवा दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनें।

हमारा मिशन

पूजा-अर्चना, धार्मिक परंपराओं, शिक्षा, अन्नदान सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण को समर्पण और पारदर्शिता के साथ बढ़ावा देना।

हमारे प्रमुख उद्देश्य

  • सनातन धर्म का संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार
  • दैनिक पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
  • भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण
  • धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना
  • अन्नदान एवं सामाजिक कल्याण
  • स्वास्थ्य एवं जनकल्याण की पहल
  • युवाओं में संस्कार एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास
  • सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना
💠 हमारे मूल मूल्य

हमारे मार्गदर्शक सिद्धांत

न्यास के प्रत्येक निर्णय, सेवा कार्य एवं आध्यात्मिक गतिविधि का मार्गदर्शन इन्हीं शाश्वत मूल्यों से होता है।

श्रद्धा

ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं सनातन धर्म के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता।

निःस्वार्थ सेवा

समाज, श्रद्धालुओं एवं जरूरतमंदों की करुणा और समर्पण के साथ सेवा करना।

ईमानदारी एवं पारदर्शिता

ईमानदारी, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता के साथ न्यास का संचालन।

सांस्कृतिक विरासत

भारतीय संस्कृति, पवित्र परंपराओं एवं आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण।

एकता

समरसता, सहयोग एवं सामूहिक प्रगति को प्रोत्साहित करना।

करुणा

प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम, सम्मान एवं करुणा की भावना को बढ़ावा देना।

🛕 सेवा के प्रमुख क्षेत्र

श्रद्धा एवं करुणा के माध्यम से समाज सेवा

श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से समाज की सेवा करता है।

दैनिक पूजा-अर्चना

दैनिक पूजा-अर्चना, आरती एवं पवित्र धार्मिक अनुष्ठान।

धार्मिक शिक्षा

धार्मिक ग्रंथों, संस्कारों एवं आध्यात्मिक शिक्षा का प्रसार।

अन्नदान सेवा

श्रद्धालुओं एवं जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण एवं सामूहिक प्रसाद सेवा।

धार्मिक उत्सव

महाशिवरात्रि, नवरात्रि एवं अन्य पवित्र धार्मिक उत्सवों का आयोजन।

सामाजिक कल्याण

विभिन्न सामाजिक कल्याण एवं मानवीय सेवा गतिविधियाँ।

युवा एवं संस्कार शिक्षा

युवाओं को संस्कार, संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना की दिशा देना।

राहत एवं सहायता

आपातकाल एवं आपदा की परिस्थितियों में राहत एवं सहायता प्रदान करना।

पर्यावरण जागरूकता

वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता।

📜 पंजीकरण एवं वैधानिक जानकारी

पारदर्शिता एवं वैधानिक अनुपालन

श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास एक विधिवत पंजीकृत धार्मिक एवं सामाजिक न्यास है, जो पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं लागू नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है।

🏆 हमारी उपलब्धियाँ

सेवा एवं समर्पण की हमारी यात्रा

वर्षों से श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से निरंतर समाज की सेवा करता आ रहा है।

40+

सेवा के वर्ष

50K+

श्रद्धालु

250+

धार्मिक आयोजन

150+

सेवा पहल
🙏 हमारे पावन मिशन से जुड़ें

श्रद्धा, सेवा एवं संस्कृति के संरक्षण में सहभागी बनें

आपका सहयोग धार्मिक अनुष्ठानों, अन्नदान सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण की गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने में सहायक है। आइए, मिलकर श्रद्धा, करुणा एवं निःस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूत करें।

दान करें

धार्मिक एवं सामाजिक कल्याण गतिविधियों में सहयोग करें।

स्वयंसेवक बनें

हमारी सेवा गतिविधियों का सक्रिय हिस्सा बनें।

सहभागी बनें

पूजा-अर्चना, धार्मिक उत्सवों एवं आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागी बनें।

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